पहला आनन्दमयी एहसास-1 / Pehla anandmayi ehsaas-1

पहला आनन्दमयी एहसास-1 / Pehla anandmayi ehsaas-1

मेरा नाम यश है और मैं 26 साल का नौजवान हूँ, l2starnest का नियमित पाठक हूँ…

हर रोज मेरा मन करता कि मैं भी अपने जीवन की कोई कहानी आपसे शेयर करूँ… इसलिए आज अपने जीवन की पहली सच्ची घटना आपसे शेयर कर रहा हूँ…

मैं जब बारहवीं कक्षा में था, रोज प्राइवेट बस से स्कूल आया जाया करता था… मेरे साथ एक लड़की रोज उसी बस में सफ़र करती थी नाम था उसका अम्बिका… मेरी ही हम उम्र थी ! वो दूसरे स्कूल में जाती थी… मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी प्यार करने का मेरा कोई मन नहीं था क्योंकि उस वक़्त मैं प्यार करने की उम्र में नहीं था…

वो जब भी बस में आती थी तो मैं उसे ही देखता रहता था… वो भी मेरी तरफ स्माइल पास कर देती थी। हम कभी कभी पास बैठ जाते थे… एक दिन मैं उसके पास बैठा था तो मैंने उसे कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो…

तो वो शरमा उठी…

मैंने उसे कहा- मुझसे दोस्ती करोगी?

तो उसने मेरी तरफ देखा और हाँ कर दी…

मैंने उसके वक्ष की तरफ देखा… मन किया कि उन्हें छू लूँ… उसके स्तन 32 इन्च के होंगे, बड़े ही मस्त लग रहे थे… मन कर रहा था कि बस उन्हें दबा दूँ पर यह सोच कर कि यहाँ ऐसा कुछ नहीं हो सकता, उसे कहीं मिलने को बोला।

तो उसने मुझे कहा- कहाँ मिलोगे?

मैंने कहा- मेरे घर चलना, कल हम वहीं बैठ कर बात करेंगे।

तो उसने कहा- नहीं, तुम मेरे ही घर आ जाना… मेरे घर पर दिन में कोई नही रहता है।

मैंने कहा- ठीक है।

मैं दूसरे दिन तैयार होकर उसके घर पहुँचा… जैसे ही उसने दरवाजा खोला, मैं दंग रह गया उसे देख कर… उसने काले रंग का सूट पहन रखा था और उसमें वो और भी खूबसूरत नज़र आ रही थी। उसने मुझे अन्दर बुलाया, दरवाजा बंद कर दिया और बोली- अन्दर कमरे में आ जाओ…

मैं उसके पीछे पीछे कमरे में चला गया… हम बेड पर बैठ गए, आपस में बात करने लगे…

कुछ देर बात करने के बाद वो उठकर रसोई में गई और मेरे लिए कॉफ़ी और कुछ खाने को ले कर आई।

हम दोनों ने मिलकर नाश्ता किया फिर बातें करने लगे… वो मेरे नजदीक बैठी थी तो मैं उसके हाथों को हाथ में लेकर सहला रहा था।

उसने बोला- यश, एक बात बताओ, तुमने कभी किसी भी लड़की को बाहों में लिया है?

मैंने कहा- नहीँ यार… पर तुझे लेने का मन कर रहा है…

उसने कहा- तो ले लो ! मैंने कब मना किया है।

इतना कहते ही मैंने उसे बाहों में ले लिया…

बाहों में क्या लिया, हम दोनों के होश खो गए, साँसें तेज़ होने लगी… मेरा हाथ उसके कमर पर जाने लगा और उसके हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे।

मैंने कहा- किस कर लूँ?

तो बोली- यश, पूछो मत कर लो… पर ज्यादा जोर से मत करना वरना होंठ सूज जायेंगे और घर वालों को पता लग जायेगा…

मैं उसके होंटों पइ किस करने लगा… वो मेरा साथ देने लगी… मैं चुम्बन करते करते उसकी चूचियों को दबाने लगा… मेरा लंड खड़ा हो चुका था और उसके बदन को छूने लगा।

उसने बोला- यश, प्लीज रुकना मत यार !

मैंने कुछ सोचे समझे ही अपनी शर्ट खोल दी…

वो बोली- यश, यह बनियान भी निकाल दो।

मैंने तुरंत अपनी शर्ट निकाल दी… फिर मैं भी मजाक में बोला- यार, तुम भी यह कुर्ती निकाल दो !

तो उसने कुछ नहीं कहा और शरमा कर नज़रें चुराने लगी…

मैं इशारा समझ गया और बिना कुछ कहे बड़े प्यार से उसकी कुर्ती निकाल दी…

उसने जामुनी रंग की ब्रा पहन रखी थी… मैं उसे भी हटाना चाहता था पर थोड़ा झिझक रहा था… मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरते फेरते उसकी ब्रा के हुक खोल दिए वो मेरे सीने से चिपक गई और शरमाने लगी।

मैं समझ गया कि वो भी वही चाहती है जो मैं…

मैंने ब्लू फिल्म एक बार देखी थी तो थोड़ी बहुत जानकारी थी… पर सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानता था और ना इतनी समझ थी…

बस जब भी कभी सेक्स का मन होता तो हस्तमैथुन करता था… पर आज ये सब हकीकत में हो रहा था तो मेरा लंड सर्वशक्तिमान बन कर खम्बे की तरह सख्त हो गया…

मैंने उसका हाथ धीरे से अपने लंड पर रख दिया तो वो झिझक गई और अपना हाथ हटा दिया…

मैं भी थोड़ा सा डर गया, मैंने सोचा कि शायद अम्बिका बुरा मान गई…

मैंने उसे सोरी बोला और पूछा- बुरा मान गई ना…? अब नही करूँगा ऐसी गलती।

तो वो बोली- नहीं यश ऐसा कुछ नही है…

मैंने कहा- तो फिर क्यों हाथ हटा दिया?

तो वो कुछ ना बोली।

मैंने सोचा कि इसने ऐसे ही हटा दिया होगा, मैंने दुबारा हिम्मत की और उसे कहा- मेरी जींस की ज़िप खोल कर इसे बाहर निकालो…

तो उसने अपना सर हिला कर ना कर दी…

मैंने उसे दोबारा बोला- मेरी कसम तुम्हें ! खोलो ना !

तो उसने गुस्सा दिखाते हुए मेरी जींस की ज़िप खोल दी, बोली- यश कसम मत देना बस…

मैंने अपने अपनी जीन्स की हुक खोली और जीन्स नीचे सरका दी… साथ में अंडरवियर भी…और उसका हाथ पकड़ कर लंड पर रख लिया और हिलाने लगा…

मैंने नीचे हाथ किया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया… सलवार नीचे गिर पड़ी… मैं नीचे बैठ कर उसकी पेंटी को देखने लगा…

और अपने दोनों हाथों से धीरे धीरे नीचे खिसकाने लगा…उसे पूरी नंगी करके और नीचे बैठ कर ही उसकी चूत पर किस करने लगा।

वो सककपा सी गई और सिसकारियाँ भरने लगी और अपने हाथों को मेरे बालो में फिराने लगी…

मैंने उसे गोद में उठाया उसे और बिस्तर पर ले गया…

उसका नंगा बदन देख मुझसे रहा ना गया, उसे सीधा लिटा कर किस करने लगा वो सिसकारियाँ भरने लगी।

मैंने उसका हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रखवा दिया तो उसने तुरंत बोला- यश, यह तो बहुत बड़ा है?

मैंने कहा- नहीं बाबू ! बस तुम्हें लगता है।

बोली- कितना बड़ा है?

मैंने कहा- मुझे नहीं पता, पर तेरे लिए फिट है।

उसने कहा- मेरे पास स्केल है तो अभी नाप लेते हैं।

तो उसने पास पड़ी बैग से स्केल निकाली और नापने के लिए बोला।

तो मैंने पहली बार अपना लंड नापा तो पता चला की मेरा लंड 7 इंच का है…

वो बोली- यश यह अन्दर तो चला जायेगा ना?

मैंने कहा- देखते हैं ! मैंने कौन सा पहले किया है।

फिर मैं उसके उरोज दबाने लगा, उसके माथे को चूमते हुए गालों को चूमा, फिर गर्दन से किस करते उसके निप्पल चूसने लगा।

वो आह ऑफ हो आह की आवाजें निकालने लगी और अपने हाथों के नाख़ून मेरी पीठ में गड़ाने लगी…

दर्द तो हो रहा था मुझे पर दर्द में भी आनन्द भी आ रहा था…

मैं उसके पेट पर चूमते हुए नीचे सरकने लगा, उसकी नंगी चूत देख मेरे अन्दर भूचाल आ गया, पहली बार हकीक़त में खुली चूत देख रहा था… उसकी चूत पर बाल नहीं थे… मैं उसकी चूत पर मुँह लगा कर चाटने लगा तो वो एकदम उछल पड़ी और तड़फने लगी… और बोलने लगी- यश, और चूसो…

मैंने 69 की पोजीशन बनाई और उसे बोला- तुम भी मेरा लंड चूसो…

वो बोली- ये मुझसे नहीं होगा !

तो मैंने कहा- मुझसे कैसे हो रहा है…?

तो वो बोली- पर मुझसे उलटी आ जाएगी।

मैंने कहा- मैं नीचे से तेरी चूत चाट रहा हूँ, मुझे आई क्या… तुझे आनन्द ही आ रहा है ना?

तो वो बोली- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और मन कर रहा है कि तुम यूँ ही चूसते और चाटते रहो।

तो मैंने कहा- तुम भी मेरा लंड चूसोगी तो मुझे भी ऐसा ही मज़ा आएगा…

बोली- यह बहुत बड़ा है यार…

मैंने कहा- मुँह में ले ! डर मत…

और उसने वैसा ही किया, वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी, मैं नीचे उसकी चूत को जीभ डाल कर चाट रहा था।

मैं उसके मुँह में ही झटके मारने लगा क्योंकि मेरा पहला सेक्स था तो मुझसे रहा ना गया और गलती से उसके मुँह में ही पानी छुट गया…

उसके मुँह में मेरे वीर्य के जाते ही वो मुझे हटा कर बाथरूम में चली गई।

कुछ देर बाद वो गुस्से से भर कर आई, बोली- यह अच्छा नहीं किया यश तूने !

मैंने कहा- सॉरी…

फ़िर मैंने कहा- अच्छा नहीं था क्या?

तो बोली- मेरा पूरा मुँह भर गया यार, थोड़ा सा अन्दर भी गया… फीका फीका सा था… पर लगभग बुरा भी नहीं था…

मैंने कहा- ठीक है, मैं तुम्हारी चूत का रस पी लूँगा…

वो बोली- मेरी चूत भी ऐसा करेगी क्या?

मैंने कहा- शायद ! चल देखते हैं…

उसने कहा- तो फिर देखो !

मैंने उसे लेटाया और उसकी चूत चाटने लगा…

वो बहुत गर्म होने लगी, मैं उसकी चूत की दोनों क्यारियों के बीच अपनी जीभ फिराने लगा… उसकी सिसकारियाँ मुझे ज्यादा ही उत्तेजित करने लगी…

उसने बोला- यश कुछ करो यार ! बहुत ज्यादा बेचैनी हो रही है…

मैंने कहा- सेक्स कर लेते हैं !

तो बोली- कुछ भी करो पर अब मेरी बेचैनी को शांत करो… मैं बहुत तड़फ रही हूँ…

मैंने कहा- फिर रुक !

और मैं वापस 69 वाली पोजीशन में आ गया और बोला- थोड़ा लंड गर्म कर दे वरना अन्दर सही तरीके से नहीं जायेगा…

उसने वही किया और मेरा लंड चूसने लगी… मैं उसकी चाट ही रहा था तो बोल पड़ी- यश, नीचे कुछ कुछ हो रहा है, जैसे शु शु निकल रहा हो !

मैंने कहा- पागल निकलने दे… ये वही हैं जो मेरे लंड ने थोड़ी देर पहले तुम्हारे मुँह में छोड़ दिया था…

बोली- फिर अब तुम भी पियो !

मैंने कहा- ठीक है !

उसकी चूत पानी छोड़ने लगी और मैं उसकी चूत में जीभ डाल कर चाटने लगा।

वो बोली- यश, अपना पेनिस डालो जान अन्दर !

मैं सीधा होकर उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत पर अपना लंड लगा कर अन्दर डालने लगा… पर लंड अंदर नहीं जा रहा था, बाहर ही फ़िसल रहा था बार बार… क्योंकि मुझे भी पता नहीं था कि क्या हो रहा था।

मैंने दुबारा कोशिश की पर नाकामयाब रहा… इस बार उसे कहा- अपने पैर एकदम फैला दो !

और मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और थोड़ा दबाव बनाया तो वो चीख पड़ी, बोली- दर्द हो रहा है।

मैंने कहा- बाबू, दर्द में ही मज़ा आएगा… थोड़ा सा दर्द सहन कर लो, फिर आपको भी ये सब अच्छा लगने लग जायेगा…

वो बोली- धीरे धीरे करो फिर…

मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूचों पर रखे और अपने सुर्ख होंठ उसके गुलाबी होंटों पर रख कर चूसने लगा… और लंड का दबाव उसकी चूत में बनाने लगा… लंड आधा अन्दर जा चुका था… उसकी आँखों में आँसू आने लगे।

मैंने कहा- हटूँ क्या बाबू?

तो उसने बोला- नहीं जान, करो ! हटो मत, बस करते जाओ जान…

उसके कहते ही मुझमें और हिम्मत आ गई और मैंने एक जोर का झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में समा गया…

उसकी आँखें फटी की फटी रह गई, उसने दर्द की वजह से मेरे होंठों को अपने दांतों से दबा दिया… फिर मैं एक पल में शांत हो गया फिर धीरे धीरे झटके देने लगा…

उसे पहले तो थोड़ा दर्द हुआ, फिर उसे मज़ा आने लगा और उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे और उसकी साँसें मेरी साँसों में समाने लगी…

मैं धीरे धीरे अपने लंड से चूत में दबाव बनाते हुए झटकों की स्पीड बढ़ाने लगा… कमरे में सिसकारियों की आवाज… धप-धप की आवाज और उसकी आहें मुझे बहुत रोमांटिक करने लगी…

उसने बोला- जान, मेरी चूत से फ़िर पानी निकल रहा है।

मैंने कहा- बाबू, अब निकलने दो, आप ध्यान मत दो !

और मैंने चुदाई का काम चलने दिया…

थोड़ी देर में मेरा भी लंड आवेश में आ गया और उसकी चूत में पानी छोड़ने लगा…

मुझे डर था कहीं वो प्रेग्नेंट ना हो जाये इसलिए उसे कहा- तुरंत नीचे जमीन पर बैठ जाओ !

और उसने वो ही किया तो उसकी चूत लाल लाल पानी निकालने लगी।

मैं समझ गया कि उसकी सील टूट गई… फिर हम दोनों बाथरूम जाकर फ्रेश हो गए… दोनों को एक दूसरे से अलग होने का मन नहीं था पर उसके घर वालों के आने का समय हो चुका था इसलिए मैं वहाँ से आ गया… इसके बाद हम मौका देखते ही मिलते रहे और भरपूर सेक्स करते रहे…

उस सेक्स के बाद मेरी जिन्दगी एकदम बदल गई…