अडल्ट वाली मस्ती / Adult wali masti

अडल्ट वाली मस्ती / Adult wali masti

प्रेषक : स्वप्निल

दोस्तो, मैं नील पुणे से एक बार फिर से आया हूँ मेरा एक और अनुभव आप लोगों से बांटने के लिए !

वहाँ पर बहुत सारे लोग आए थे, जब मेरा नंबर आया तो मैं अंदर जाने के लिए उठा तो उसने ऑल दी बेस्ट कहा, मैंने हँस कर थैंक्स बोला।जब अंदर गया तो वेतन के मुद्दे पर मैंने मना कर दिया और उठ कर चला आया। वो लड़की वहाँ पर नहीं थी, मुझे लगा शायद चली गई होगी। मैंने बाहर आकए एक सिगरेट मारकर मेरी बाइक निकाली तो वो पंक्चर थी।

मैं धक्का मार कर उसे धकेलते हुए लेकर जा रहा था। पंक्चर वाला बस स्टैण्ड के बगल में ही था। कुछ देर बाद वो लड़की चलते चलते बस स्टैंड पर आ गई, मुझे वो देख रही थी पर बात नहीं कर पा रही थी तो मैं ही बात करने के लिए उसके पास गया।

“कैसा रहा इंटरव्यू?”

वो बोली- ठीक था, ‘फोन करेंगे’ बोला है।

“तो तुम अब दूसरी जगह भी जाओ इंटरव्यू के लिए !”

“नहीं इन्होंने बोला है कि ये फोन करेंगे।” उसने थोड़ा गुस्से से कहा।

तब मुझे पता चला कि यह पुणे से नहीं है, कहीं बाहर की है और पहला ही जॉब ढूंढ रही है।

मैंने पूछ ही लिया- कहाँ से हो?

उसने बोला- मैं नागपुर से हूँ और ग्रॅजुयेशन के बाद पुणे में आई हूँ, यहाँ पर मेरे अंकल रहते हैं।

उसने जो एरिया बताया वो मेरे घर से 6 किलोमीटर दूर था तो मैंने उसे पुणे के बारे में और यहाँ के इंटरव्यू के बारे में सब बता दिया। तो वो थैंक्स कह कर बस से चली गई और मैं उसको भूल गया।

फिर मेरा जॉब सिटी में लगा एडमिन मैनेजर कर के !

तकरीबन दो हफ्ते बाद वही लड़की हमारे ऑफ़िस में आई इंटरव्यू के लिए। जब उसका नंबर आया और उसने मुझे देखा तो वो थोड़ा हैरान हो गई- आप यहाँ?

मैंने कहाँ- हाँ, अभी तक नौकरी नहीं मिली?

फिर मैंने उसका इंटरव्यू लिया और उसके बारे में बहुत कुछ जान लिया। वो बहुत ही एक्टिव लड़की थी, मैंने उसे नौकरी के लिए रिकोमेन्ड किया और उसे रख लिया गया।

वो ऑफ़िस आने लगी अओर मैं उसकी तरफ़ खिंचा चला जा रहा था। हम हमेशा साथ में रहने लगे और घूमने लगे, ऑफ़िस में इसके बारे में बातें होने लगी पर मैं सिनियर था तो मुझे कोई बोल नहीं रहा था।

जब भी मैं उसे स्पर्श करता तो उसका चेहरा एकदम से फूल जाता था, मुझे ये सब बातें समझ में आने लगी, तब मैंने फ़ैसला किया के अब इसके साथ मुझे आगे बढ़ना चाहिए तो मैंने उसे डिनर के लिए निमन्त्रित किया।

हम अच्छे से होटल में खाना खा रहे थे, तब मैंने पूछा- नीता, तुम्हारा कोई बायफ़्रेंड नहीं है?

वो एकदम से डर गई, फिर उसने मुझे उसकी पूरी कहानी बता दी जिसमें उसको उसके बायफ़्रेंड ने कैसे धोखा दिया। मैंने सोचा कि चलो काम आसानी से हो जाएगा तो मैं उसका हाथ अपने हाथ में लेकर बोला- यार, होता है ! कभी कभी हम धोखा खा जाते हैं।

और मैंने उसका हाथ थोड़ा सा दबाया।

रात को मैंने उसे एक मैसेज भेजा कि ‘तुम्हारी वजह से मुझे नींद नहीं आ रही है।’

दूसरे दिन जब हम ऑफ़िस से आ रहे थे, तब उसने मुझे मेरे रात वाले मेसेज के बारे में पूछा तो मैंने सीधा बोल दिया कि ‘मैं रात को तुम्हारे साथ सोना चाहता हूँ !’

तो वो बिना कुछ बोले चली गई।

रात को दो बजे उसका मिस कॉल आया तो मैंने उसे फोन किया- क्या हुआ?

“मुझे कुछ हो रहा है !”

“क्या हो रहा है?”

“पता नहीं, पर तुम्हारी याद आ रही है, तुम्हारे पास आने को जी कर रहा हैं और…”

“और क्या?”

“और कुछ नहीं !”

मैंने बहुत ही प्यार से पूछा- और क्या?

जो उसने बोला वो सुन कर मेरे होश उड़ गये, उसने पूछा- क्या तुम मुझसे मस्ती कर सकते हो?

“मतलब?” मैंने नासमझ होकर पूछ लिया।

“मुझे मस्ती करनी है अडल्ट वाली मस्ती !”

मैंने उसे ओके बोला और आगे की बात समझाई।

अगले दिन मैंने उसे छुट्टी दी और मेरे रूम पर आराम करने को बोला और में ऑफ़िस चला गया। मुझे पता था कि अगर हम दोनों एक साथ छुट्टी लेंगे तो ऑफ़िस में सब लोग सोच में पड़ जाएँगे।

दोपहर को मैं घर पर उड़ते उड़ते ही पहुँच गया। अंदर जाते ही मैंने उसे दबोच लिया और उसके पूरे शरीर पर चूमाचाटी करने लग गया। वो भी सेक्स के लिए तड़प रही थी, कुछ बोलने वाली थी तो मैंने उसे रोका और बोला- अब कुछ मत बोलो !

मैं उसे एक भूखे शेर की तरह चाट रहा था और उसके मुँह से सिर्फ़ सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगा हो गया, मैं उसको नंगी देख कर ही पागल हो जा रहा था और मेरा शेर अपने विशालतम रूप में आ गया था।

उसके कोमल मम्मे देखकर मैंने अपना चेहरा ही उनके बीच में घुसेड़ दिया, मैं उसके निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरा हाथ में लेकर मसलने लगा। उसके हाथ मेरे शरीर पर ऐसे घूम रहे थे कि मानो किसी को बहुत दिनो के बाद खाना नसीब हुआ हो।

हम दोनों भी बहुत दिनो से प्यासे थे और एक दूसरे पर टूट पड़े थे।

मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी चिकनी चूत को हाथों से सहलाने लगा, वो बहुत ही गर्म हो गई थी और उसके मुँह से सिर्फ़ सिसकारियाँ निकल रहीं थी- ऊउह… आआअह… अई… ईईह… करके वो मेरे जोश को और बढ़ा रही थी।

मैंने बिना सोचे उसकी चूत पर अपनी जीभ से धावा बोल दिया और खुशी के दर्द के मारे नीता उछलने और चिल्लाने लगी।

चाट चाट कर मैंने उसका नमकीन पानी निकाल दिया।

जब मैंने उसको 69 में आने को कहा और मेरा लंड उसके हाथ में दिया तो वो एकदम सिहर सी गई और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर मज़े से चूसने लगी। ऐसा लग रहा था कि साली पूरा का पूरा खा जाएगी।

करीब 15 मिनट की चूमाचाटी के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने उसे सीधा बेड पर लिटाया और उसके होठों पर होंठ रख दिए।

उसे पता था कि क्या करना है, उसने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के मुँह पर रख दिया और आँखों से इशारा किया। मैंने उसे कस कर पकड़ा और ज़ोर से धक्का लगाया, आधा लंड चूत के अंदर गया और उसकी आँख से पानी आ गया।

मैंने पहले ही उसका मुँह बंद करके रखा था तो वो चिल्ला नहीं पाई। यह कहानी आप l2starnest डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

थोड़ी देर रुक कर मैंने उसको पूछा- दर्द हुआ क्या?

“बहुत दिनों से तड़प रहीं हूँ, जाने कितने महीनों बाद मेरी चूत में लंड घुसा है, मत रूको, फाड़ दो मेरी चूत को, भोंसड़ा बना दो इसका !”

मैं कहाँ रुकने वाला था, मैंने भी अपना काम शुरु किया और ज़ोर ज़ोर से अन्दर बाहर करने लगा। उसने आँखें बंद कर ली और उसके मुँह से सिर्फ़ सिसकारियाँ निकल रहीं थी, बड़बड़ा रही थी- और ज़ोर से, आह… आऐ… अईई… उह… उफ़… मार दे… ज़ोर से ठोक दे… रे… और ज़ोर से !

उसके बड़बड़ाने से मैं और भी जोश में आ रहा था। बीस मिनट हमारी पेलमपेल चली और वो एक बड़ी चीख के साथ खाली हो गई।

मैं भी बस अब मंजिल पर पहुँचने वाला था, तो मैंने उसको पूछा- मेरा आने वाला है, कहाँ निकालूँ?

“अंदर ही छोड़ दे, पूरी तरह से चुदना चाहती हूँ मैं !”

मैंने अपनी गति और बढ़ाई, 15-20 ज़ोर के धक्के लगाने के बाद मैंने मेरा सुपर शॉट लगाया और उसकी आँखों में फिर से आँसू आ गये।

अब उसके चेहरे पर खुशी झलक रही थी।

अगले कुछ मिनट हम वैसे ही पड़े रहे।

तब वो बोली- बहुत दिनों बाद चुदी हूँ, तुम्हें मज़ा तो आया ना?

मैं उसे एक प्यारा सा चुम्बन करते हुए बोला- बहुत मज़ा आया, अब यह खेल रोज रोज, जब तुम चाहो तब चलेगा !

फिर हम उठ कर मूवी देखने चले गये। हमने बहुत दिन तक ऐसी मस्तियाँ की पर किसी बंधन में न बंधने की कसम खा ली।

हम सिर्फ़ मज़े के लए एक दूसरे का साथ देने लगे।

कुछ दिनो बाद मेरा ट्रान्स्फर ऑर्डर आया तो मैंने वो कम्पनी छोड़ दी क्योंकि मैं पुणे छोड़ कर कहीं बाहर जाना नहीं चाहता था।

मैं आप लोगों के ईमेल का इंतजार करूँगा, आप बताइए मुझे कि आपको मेरी कहानी कैसी लगी।